अपनी बुर की आग अपने स्टूडेंट से बुझवाई – Bur ki Chudai Kahani

अपनी बुर की आग अपने स्टूडेंट से बुझवाई – Bur ki Chudai Kahani

मेरी ये Bur ki Chudai Kahani मैं आप पढ़ेंगे कैसे अपनी बुर की आग अपने स्टूडेंट से बुझवाई ।

मेरा नाम नताशा है. मैं गोरी-चिट्टी, कोमल, कामिनी काया की स्वामिनी हूं और शिक्षण पेशे में हूं।
मेरी ऊंचाई 5’6″ है। मेरे बड़े-बड़े लेकिन बिल्कुल कसे हुए स्तन,
पीछे की और उभरी हुई गांड, चाँदनी सा चमकता मेरा गोरा रंग
और उसके ऊपर से मेरे सोने जैसे बाल, किसी कयामत से कम नहीं लगते।

मैं सिंगल हूं और अपने घर से हॉस्टल में रहकर जॉब कर रही हूं।

मैं अब ज्यादा आप लोगों को बोर ना करते हुए Hindi Sex Story पर आती हूँ।

जब मैं दो साल पहले यहां आई थी, तो हॉस्टल में रहकर अपना काम खुद ही कर लेती थी। मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना, इत्यादी।

लेकिन इधर कुछ दिनों से एक सुधीर नाम का लड़का था जो 12वीं का स्टूडेंट था। वह गरीब घर का था, तो मैंने उसको अपने साथ रख लिया था।

सुधीर अच्छा लड़का था. उसकी ऊंचाई करीब 5’10” थी। वह एक सवाल-सलोना टाइप का लड़का था। हुआ यू, कि एक दिन मैंने सुधीर को रोते हुए देख लिया था।

मुझे उसको रोते हुए देख कर उस पर दया आ गई जब मैंने उसको रोने का कारण पूछा तो वो बोला-

सुधीर: मेरी मां गरीब है और उसके पास फीस भरने के पैसे नहीं हैं। इसलिए मैं पढाई जारी नहीं रख पाऊंगा। मैंने सुधीर को तसल्ली दी और

बोली: तुम अपनी माँ से मुझे मिलवा दो। मैं तुम्हारी पढ़ाई का बंदो-बस्त कर दूंगी।

दूसरे दिन सुधीर की माँ आई और उसके बाद ही मैंने सुधीर को अपने साथ रख लिया, उसकी मदद करने के लिए।

सुधीर मेरे छोटे-मोटे काम कर दिया करने लगा। धीरे-धीरे सुधीर से मेरी नजदीकियां बढ़ने लगी। मेरा समय अच्छा कट रहा था।

दिसंबर के महीने में, क्रिसमस की छुट्टियों में, ज़्यादातर जॉब करने वाला स्टाफ अपने-अपने घर गया हुआ था। मैं कह जाती थी, तो मैं हॉस्टल में ही थी।

मेरी हेड मिस हॉस्टल के पास ही रहती थी। शाम को मैंने सुधीर को खाना बनाने के लिए कहा और खुद हेड मिस के घर चली गई। वह बिलकुल सही था और कोई भी आस-पास नहीं था।

जब मैं अंदर जाने लगी, तो मुझे अजीब सी आवाजें सुनाने लग गई।

उत्सुकता में जब मैंने अंदर झांक कर देखा, तो मेरी हेड मिस इंदु, जो दिव्य पर्सनालिटी की थी,

भरे हुए बदन की थी, बड़े-बड़े स्तन और मोटी फेली हुई और चकोर गांड की थी, वो नंगी ही कमरे में लेती हुई थी।इंदु ने अपने तांगे फेला रखी थी और उसकी बुर साफ दिख रही थी।

इंदु मैम ने अपने एक हाथ से अपनी बुर की दोनों पंखों को खोल रखा था और उनका कुत्ता उनकी बुर चाट रहा था। मैम आह्ह… आह्ह.. ओह्ह.. करके, गांड उछाल-उछाल कर मज़े ले रही थी।

ये देखा कर, जैसे मेरे भी जिस्म से पसीना छूटने लग गया। कुछ देर उनको देखने के बाद, मैं वापस आ गयी। सुधीर तब तक खाना तैयार कर चुका था।

मैंने अपने कपड़े चेंज किये और अपने शरीर पर एक गाउन पहन लिया। फिर मैं बैठ गयी और अभी भी मुझे पसीना आ रहा था। सुधीर ने मुझे देखा और चौंक कर बोला-

सुधीर: आप ठीक तो हैं ना मैम? सर्दी में आपको पसीना क्यों आ रहा है? फिर मैंने कहा: पता नहीं, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा।

सुधीर ऐसा करो, मेरे हाथ-पैर दबा दो। सुधीर मुस्कुराये हुए तैयार हो गया और मेरे करीब आ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर वो पहले मेरे पैरो को दबाने लग गया।

सुधीर के मजबूत हाथों का स्पर्श मुझे सुकून दे रहा था। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और सुधीर मेरे बदन की मालिश कर रहा था।

धीरे-धीरे सुधीर मेरे गाउन को ऊपर चढ़ गया और अब वो मेरी जाँघो तक पहुँच गया था। मैं बीच-बीच में उसको चोर निगाहों से देख रही थी।

सुधीर का स्पर्श, मुझे सुखद एहसास दे रहा था। सुधीर आगे बढ़ता हुआ, मेरी बुर के आस-पास हाथ फिराने लगा।

मालिश की कला में विशेषज्ञ की तरह, उसकी उंगलियां मेरे तन बदन को मस्ती से भर रही थीं। शायद एक कामिनी के जिस्म का स्पर्श, सुधीर को भी सुकून दे रहा था।

उसकी सांसे तेज़ चलने लगी थी और चेहरे की लालिमा बिगड़ गई थी।

अब तो सुधीर की उंगली कभी-कभी मेरी बुर के अंदर भी जाने लग गई थी। मैंने चोर निगाहों से देखा, तो सुधीर जिसको मैं छोटा बच्चा समझती थी,

उसका मोटा और बड़ा सा लंड फुकरे मारता हुआ, उसकी पैंट से बाहर आ रहा था। फिर सुधीर ने अपने घुटनों के बल पर मेरी बॉडी दोनों तरफ से बना ली।

अब अपने घुटनों को दोनों तरफ रखते हुए, वह मेरे शरीर को अपनी दोनों टांगों के बीच में लेके बैठ गया और मेरी नाभि पर हाथ फेरने लग गया।

फिर वो मेरी नाभि को मसलने लग गया। अब मेरे स्तन बहुत सकथ हो चुके थे। ये कहानी आप हमारी वासना पर पढ़ रहे हैं।

मैं सुधीर के दोनों घुटनों के बीच में थी और सुधीर का मोटा और खड़ा हुआ सप्तम लंड बिल्कुल मेरी बुर के ऊपर फुकरे मार रहा था।

मुझे लग रहा था कि सुधीर का लंड मेरी बुर के अंदर जाने की तरकीब खोज रहा था। सुधीर के हाथ मेरे स्तनों के इर्द-गिर्द घूम रहे थे,

जैसे कि वह ऊपर की ओर हाथ बढ़ाने की कोशिश कर रहा हो। अब उसका लंड मेरी बुर को छू रहा था और मैं भी पूरी गरम हो चुकी थी।

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लेकिन दिखाने के लिए, तो मेती दोनो आंखें बंद थी। एक-एक सुधीर का बदन तेजी से नीचे की तरफ झुका।

उसने मेरी पैंटी नीचे की और उसका तना हुआ फौलादी लंड, जो मेरी बुर के मुँह के निशाने पर था, एक ही झटके में मेरी बुर में घुस गया। मेरा तो पूरा बदन काम हो गया।

मैंने झटके से आंखें खोली और सुधीर को देखा। सुधीर ने जब मेरी आंखें खुली हुई देखीं, तो वो बोला-

सुधीर: प्लीज मैम, अब मुझे मत रोकना।

मैं तो खुद कब से अपनी Bur Chudai के लिए तड़प रही थी। लेकिन रोकने का दिखावा करने के लिए मैं बोली-

मैं: सुधीर ये सब ठीक नहीं है। तुम मुझसे बहुत छोटी उमर के हो।

सुधीर: कुछ भी हो मैम अब मुझे करने दो। मैं सारी उमर तुम्हारी गुलामी करुंगा। ये बोलते हुए सुधीर सता-सत बुर में लंड को दौड़ा रहा था और धक्का दे मार जा रहा था।

मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी बुर में कोई तूफान आ गया हो। मुझे लगा, कि इतनी तेज़ चुदाई में ये बच्चा ज़्यादा देर तक भी नहीं पाएगा

और मैं तड़पती रह जाऊँगी। इसीलिए मैंने ज़ोर से गुस्सा करते हुए, सुधीर को बोला-

मैं: अरे साले तेरे को इतनी जल्दी क्यों है, आराम से चोद। अगर मेरी बुर की आग नहीं बुझी, तो साले तेरी गांड में बेलन घुसा दूंगी।

लेकिन सुधीर बिना ब्रेक का लोडा था और वो नहीं था। वो मेरी बुर में धक्के पे धक्का मार रहा है। मैंने सुधीर की गांड को पूरे ज़ोर से पकड़ लिया।

सुधीर का बदन कमपनी लग गयी थी। सुधीर के मुँह से आह्ह.. आह्ह… आह्ह… निकल रहा था और फिर थोड़ी देर में ही मेरी बुर में, एक गरम पिचकारी बुर पड़ी।

अब तो मैं और भी ज्यादा ताकत से सुधीर की गांड को अपनी बुर पर दबाये जा रही थी। सुधीर अब शांत हो चुका था और उसका लंड ढीला पड़ चुका था।

उसका ठीक उल्टा, मेरी बुर पूरी तरह से कस्सी हुई थी और तमतमाई हुई, उसके लंड को जकड़े हुए थे। बुर और लंड की इस जंग में, लंड की हार हो चुकी थी।

अब लंड एक बंदी की भाँति, बुर में कैद था। मैंने अपनी बुर को हरकत दी और लंड को फिर से खड़ा करने की कोशिश करने लग गई।

चुदाई की एक-एक कला में मैं माहिर हू, क्योंकि 32 की उमर तक मैं पता नहीं कितने लंडो से अपनी चुदाई करवा चुकी हू।

सुधीर के लंड को तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगा।

लंड बुर में ही पड़े-पड़े, तलवार की तरह सीधा हो गया और फौलास जैसा भी हो गया। सुधीर का लंड जब बुर में हरकत करने लगा, तो मैं बोली-

मैं: देखो बेटा, जैसे मैं बोलूँ, वैसा ही चुदाई करो। वरना इस बार लंड तो तेरी बुर में है ही, तुझे भी पूरा का पूरा अपनी बुर के अंदर ले लूंगी।

फिर सुधीर मुझे धीरे-धीरे चोदने लग गई और अब मैं गांड उछाल-उछाल कर चुदवाने लग गई। फिर मैंने सुधीर को बोला-

मैं: देख जैसे-जैसे मेरी गांड को उछालने की गति बढ़ेगी, वैसे-वैसे तू ताल से ताल मिलाकर ऊपर से चोदना।

सुधीर मेरी पूरी बात समझ गई थी और अब ग़मासन चुदाई हो रही थी। बुर और लंड को मानो जंग हो रही थी। पूरा कमरा बुर और लंड के टकराने की आवाज़ से गूंज रहा था।

उस पर काम रस से भरी हुई बुर से फच-फच की आवाज़ अलग से आ रही थी। ये कहानी आप Hindi X Story पर पढ़ रहे हैं। एक-दम मध-मस्त समा बंध चुका था।

अब बुर और लंड की इस जंग को आधा घंटा हो चुका था, पर कोई भी पहलवान हार मान-ने को तैयार नहीं था।

45 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद, मेरी बुर सिकुड़ने लग गई। मेरी बुर की दोनो फाँके साथ-साथ आ कर, लंड को कसने लग गयी।

लंड भी फुल कर दो गुना हो चुका था। मेरा बदन कामने लग गया था। मैंने सुधीर को देखा, तो वो भी काम कर रहा था। मैं आआह्ह.. आह्ह.. ओह्ह.. हम्म्म.. करके चिल्ला रही थी।

मैं: चोद इसको मादरचोद, और चोद इसको, ज़ोर से चोद भोंसड़ी के।

और सुधीर तबादला तोड़ धक्के मारे जा रहा था। आखिर उसका लंड पीछे हुआ और मेरी बुर गर्मा-गर्म मदन रस से भर गई।

मदन रस की फुहार ने मेरी बुर का भी पसीना छुड़वा दिया। मैं आह.. आह.. करके निधाल हो गई और सुधीर भी मेरी मस्तानी चूचियों पर गिर पड़ी।

बुर और लंड की जंग तो हो चुकी थी, लेकिन इस जंग के कारण तन-बदन में एक भांग सी घुल गई थी। कुछ देर बेसुध होकर पड़े रहने के बाद, सुधीर मेरे बदन से अलग हुआ।

मैं भी बाथरूम में चली गई। जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो सुधीर मुझे फिर से Bur Ki Chatai लग गया।

सुधीर ने पहली चुदाई की थी और उसका लंड मिंटो में टावर की तरह खड़ा हो रहा था।

उसका लंड फौलाद की तरफ़ से हो सकता था। पूरी रात वो बस मुझे चोदता रहा, चोदता रहा और मैं चुदवा-चुदवा कर मस्त हो गई थी। अब सुधीर मुझे हर रोज चोदता है।

मेरी तो सुधीर के मिलने से सारी समस्या का ही समाधान हो गया। यानी मुझे भोजन और चोदन सब मिल चुका था।

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